दिल्ली:
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के कारण चार सप्ताह से भी कम समय में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है और जब बाकी दुनिया ईंधन बचाने के लिए कड़े कदम उठा रही है जिसमे ऑड-ईवन, 4 दिन का वर्क वीक, स्कूल और ऑफिस बंद करना और ईंधन की कीमतें 20-30% तक बढ़ाना, जैसे उपाय का सहारा ले रही है , वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कूटनीतिक कौशल का लोहा मनवाते हुए भारत में ऊर्जा सुरक्षा, उपलब्धता और किफायतीपन का एक नखलिस्तान बनाया हुआ है।
केंद्रीय नेचुरल गैस एवं पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि “सरकार ने तेल कंपनियों की मदद के लिए अपनी टैक्स से होने वाली कमाई कम कर दिया है, ताकि वैश्विक कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण उनके लिए नुकसान (पेट्रोल पर लगभग ₹24 प्रति लीटर और डीजल पर ₹30 प्रति लीटर) को कम किया जा सके और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के साथ, केंद्र ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की है और घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निर्यात शुल्क लगाया है, जबकि उपभोक्ताओं को बचाने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय प्रभाव को अवशोषित किया है जिसमे भारत सरकार पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर शून्य (शून्य) 10 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। ऊर्जा बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं में वैश्विक अस्थिरता के बीच, भारत सरकार ने फिर से पुष्टि की है कि लॉकडाउन का कोई प्रस्ताव नहीं है, जिसमें नागरिकों से शांत रहने और गलत सूचना से बचने का आग्रह किया है।
कमर्शियल LPG की सप्लाई को और आसान बनाने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए, भारत सरकार ने राज्यों के लिए कमर्शियल LPG का कोटा बढ़ाकर 70% करने का फैसला किया है, इसमें से 20% कोटा स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और अन्य ज़्यादा मजदूरों वाली इंडस्ट्रीज़ को दिया जाएगा एवं उन इंडस्ट्रीज़ को प्राथमिकता दी जाएगी, जहाँ पाइप वाली गैस का कोई विकल्प मौजूद नहीं है जबकि यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में हुई तीव्र वृद्धि के बाद लिया गया है, जो पिछले एक महीने में लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई है फिर भी वैश्विक कीमतों में उछाल के बावजूद भारत सरकार ने ईंधन की कीमतें स्थिर रखी है।
दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई:
- दक्षिण-पूर्व एशिया: +30–50%
- उत्तरी अमेरिका: +30%
- यूरोप: +20%
- अफ्रीका: +50%
लॉकडाउन नहीं लगेगा, भारत सरकार के इस बड़े आश्वासन से भारत की जनता ने रहत की सांस ली है और उनका कहना है कि सरकार के इस पर स्पष्टता देखकर अच्छा लगा है लेकिन ऐसी स्थितियों में सरकार को अब बड़ा ध्यान इस बात पर हमेशा रखना होगा कि अगर वैश्विक अस्थिरता जारी रहती है तो आपूर्ति और कीमतें कितनी स्थिर रहती हैं।